पूर्वांचल में मोदी के राष्ट्रवाद के सामने धड़ाम हुआ प्रियंका का नरम हिंदुत्व

Daily Hunt News 5/24/2019 5:08:35 PM

भदोही। पूर्वांचल में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का नरम हिंदुत्व काम नहीं आया। 2019 के आम चुनाव में मोदी के राष्ट्रवाद के सामने पूर्वांचल की दर्जन भर से अधिक सीटों पर कांग्रेस हवा हो गयी। राजनीतिक इतिहास में गांधी परिवार के लिए सबसे बड़ा संकट अमेठी साबित हुआ, जहां 42 साल बाद कांग्रेस को पराजित होना पड़ा। प्रियंका अपने नेतृत्व में भाई राहुल गांधी की सीट भी नहीं बचा पायी। अपनी गंगा बोट यात्रा के दौरान उन्होंने प्रयाग से काशी तक के सफर में गंगा, मंदिर-मस्जिद के जरिए हिंदुत्व मतों को साधने की नीति बनायी थी, लेकिन वह काम नहीं आयी। भदोही में कांग्रेस के बाहुबली उम्मीदवार रमाकांत यादव अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए।

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पूर्वांचल में भाजपा के लिए सबसे बड़ा नुकसान गाजीपुर से हुआ, जहां केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा अपनी सीट नहीं बचा पाए और बसपा उम्मीदवार अफजाल अंसारी से पराजित हो गए। वहां की जनता ने विकास को भी नकार दिया। आजमगढ़ में भी भाजपा की भोजपुरी सिनेमा राजनीति काम नहीं आयी और पूर्वमंत्री अखिलेश यादव के सामने निरहुआ को पराजित होना पड़ा। पीएम मोदी ने वाराणसी से दूसरी बार बड़े मताें के अंतराल से जीत हासिल किया। जौनपुर, लालगंज, घोसी और गाजीपुर से बसपा ने परचम लहराया। राबर्ट्सगंज और मिर्जापुर सीट पर भाजपा की सियासी दोस्त अनुप्रिया पटेल का अपना दल एस कामयाब रहा। पूर्वांचल में 2014 में 13 संसदीय सीटों में 12 पर भाजपा ने जीत हासिल किया था। इस बार उसका प्रदर्शन उतना बेहतर नहीं रहा है, जबकि इस बार सपा-बसपा गठबंधन की वजह से पीएम मोदी की सुनामी यहां नहीं चल पायी और उसे सात सीट पर ही संतोष करना पड़ा, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस की रही जो पूरी यूपी में सिर्फ रायबरेली की सीट बचा पायी, जबकि अमेठी की सीट हार गयी। पूर्वांचल और यूपी में प्रियंका का कोई जादू नहीं चला। 

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भदोही में प्रियंका ने पूर्वांचल के बाहुबली रमाकांत यादव का चुनाव मैदान में उतार कर गठबंधन में सेधमारी की रणनीति चली थी, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गयी। कांग्रेस उम्मीदवार रमाकांत यादव सिर्फ 25604 मत हासिल कर पाए। कुल मत को उन्होंने सिर्फ 2.46 फीसद हासिल किया। प्रियंका गांधी की इसी नीति की वजह से कांग्रेस जिलाध्यक्ष डा. नीलम मिश्र को पद से त्यागपत्र देना पड़ा था, जिसकी मूल वजह उम्मीदवारी को लेकर प्रियंका की नीतियां थीं। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने भाजपा के वोट काटने के लिए उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन वह खुद अपनी जमींन नहीं बचा पायी। मां सोनिया गांधी रायबरेली से जीत कर कम से कम नेहरु गांधी परिवार की साख को बचाने में कामयाब रही, लेकिन अमेठी से स्मृति का जीतना कांग्रेस की बड़ी पराजय है, क्योंकि अमेठी गांधी परिवार के साख से जुड़ा था। कांग्रेस की आखिर कोशिश काम नहीं आयी। 

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