चुनावी चर्चा- रितेश देशमुख का पारिवारिक विरासत के प्रति उत्साह नहीं

Daily Hunt News 4/13/2019 10:20:23 PM

मुंबई। महाराष्ट्र की लातूर संसदीय सीट को कुछ वक्त पहले तक वीआईपी दर्जा मिला हुआ था, क्योंकि यहां से राज्य के कद्दावर नेता विलासराव देशमुख चुनाव लड़ते थे। चाहे विधानसभा का चुनाव हो या फिर लोकसभा का, लातूर तथा आसपास के इलाके में देशमुख परिवार की तूती बोलती थी। तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख के निधन के बाद लातूर का राजनैतिक परिदृश्य बदलता चला गया। विलासराव के बड़े बेटे अमित देशमुख लातूर से विधानसभा का चुनाव जरुर जीते, लेकिन इन संसदीय चुनावों के प्रति इस परिवार का रुख बहुत उत्साहवर्धक नहीं है। विलासराव देशमुख के छोटे बेटे और फिल्म स्टार रितेश देशमुख का वैसे तो राजनीति में सीधे तौर पर कोई वास्ता नहीं, लेकिन निजी तौर पर रितेश के सभी पार्टियों के नेताओं के साथ मधुर संबंध हैं। 

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मनसे के राज ठाकरे से लेकर शिवसेना के उद्धव ठाकरे, भाजपा के नितिन गड़करी से लेकर देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार तक, सभी से रितेश निजी तौर पर रिश्ते निभाते हैं। इन चुनावों को लेकर देशमुख परिवार की विमुखता का अंदाज इस बात से लगता है कि लातूर सीट पर पार्टी के प्रचार के लिए इस परिवार से कोई नहीं है। रितेश देशमुख तो तपाक से कह देते हैं कि उनकी राजनीति में दिलचस्पी नहीं है और दूसरी बात उनके पास फुर्सत नहीं है। वे फिल्मों की शूटिंग में बिजी रहते हैं और किसी राजनैतिक गतिविधि में शामिल नहीं होते। रितेश कई बार कह चुके हैं कि पिता की राजनैतिक विरासत उनके भाई अमित संभालते हैं और वे इससे दूर रहते हैं। उधर, कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि लातूर में अब इस परिवार का दबदबा नहीं रहा है और इसके लिए दोनों भाइयों रितेश और अमित को दोषी माना जाता है।

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कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि अगर अमित देशमुख को लोकसभा का टिकट मिल जाता, तो रितेश प्रचार करने के लिए रितेश लातूर में ही डेरा डाल देते और जरुरत पड़ने पर वे मुंबई से बालीवुड के अपने दोस्तों को भी चुनाव प्रचार में लगा देते। चुनावी चर्चा में कहा जा रहा है कि रितेश देशमुख को पार्टी प्रचार के साथ जोड़ना चाहती थी, लेकिन रितेश का रेस्पांस नीरस रहा और दूसरी बात, गुटबंदी की शिकार प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं ने खुद इस संभावना के रास्ते रोक लिए कि फिर से देशमुख परिवार राज्य की सियासत में मजबूत हो। 

 

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