क्या कार चलाते समय मास्क पहनना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये जवाब

Daily Hunt News 22-11-2020 03:11:00

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कोरोना के मद्देनजर कोई मास्क पहने बिना घर से बाहर ना निकले, इसे लेकर पुलिस और प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए डिजास्टर मैनेजमेंट के अध्यक्ष ने 8 अप्रैल को अपने एक आदेश में कहा था कि जनहित के लिए यह जरूरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा।

साथ ही ये भी आदेश जारी किया गया था कि किसी भी व्यक्ति के लिए पर्सनल और ऑफिस व्हीकल में भी मास्क पहनना आवश्यक होगा। लेकिन कार के अंदर अकेले होने या परिवार के ही किसी सदस्य के साथ होने पर मास्क लगाना जरूरी है अथवा नहीं इसे लेकर कन्फ्यूजन है। क्या वाकई में सड़क पर खड़ी और चलती हुई आपकी कार एक प्राइवेट स्पेस की कैटेगरी में आती है। 

Mask inside the car

इसे लेकर लोगों में भारी कन्फ्यूजन देखने को मिला। कई लोगों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का कहना था कि अगर कार के अंदर घर के ही लोग हैं तो फिर मास्क क्यों लगाया जाए। कुछ लोग तो इस मुद्दे पर पुलिस से उलझ भी गए। हालांकि पुलिस ने सभी से जुर्माना वसूला। 

दिल्ली सरकार ने यह हलफनामा दिल्ली हाई कोर्ट के वकील सौरव शर्मा द्वारा लगाई गई याचिका पर दिया है जिसमें कहा गया है कि 9 सितंबर को चलती गाड़ी को रोककर उनका चालान कर दिया गया जबकि वह अपनी गाड़ी में अकेले ही घर से ऑफिस जा रहे थे। इस पर अब याचिकाकर्ता ने मेंटल हैरेसमेंट के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा मांगा है। 

Mask inside the car

याचिकाकर्ता और वकील सौरव शर्मा का कहना था कि उनका जो चालान काटा गया उसमें मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि वसूले गए चालान की रकम को किस डिपार्टमेंट को जमा की जाएगी, यह भी साफ नहीं है। साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ऐसी कोई भी गाइडलाइन जारी नहीं की गई है जिसमें अकेले कार में सफर करते हुए मास्क लगाना जरूरी बताया गया है। इस पर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 'सतविंदर सिंह एंड ओआरएस बनाम बिहार राज्य के मामले का उल्लेख किया।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में शराबबंदी के इस मामले में कार में शराब पीते लोगों पर यह टिप्पणी की थी कि बिहार उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 2 (17A) के तहत सड़क पर मौजूद किसी भी व्यक्ति की कार प्राइवेट स्पेस की कैटेगरी में नहीं रखी जाती सकती है। जस्टिस अशोक भूषण और के एम जोसेफ की खंडपीठ ने पिछले साल 1 जुलाई को फैसला सुनाया था कि सार्वजनिक स्थानों से गुजरने वाले व्हीकल को पब्लिक प्लेस की श्रेणी में रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार राज्य के पक्ष में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया था कि उनकी कार पब्लिक प्लेस के दायरे से बाहर थी। 

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