नौसेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने वाला सुप्रीम कोर्ट का आदेश 8 महीने बाद भी नहीं हुआ लागू

Daily Hunt News 30-10-2020 22:15:00

नई दिल्ली। महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने वाला सुप्रीम कोर्ट का 8 महीने पुराना आदेश अब तक भारतीय नौसेना में नहीं लागू हो पाया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने नेवी में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन देने के अपने आदेश को लागू करने की समय सीमा 31 दिसम्बर तक बढ़ा दी है। पिछले मार्च में कोर्ट ने केन्द्र सरकार को महिला अधिकारियों को कमांडिंग पद देने और उनको स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था।

दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने 2010 में ही सेनाओं में महिलाओं के कमांडिग पदों पर स्थायी कमीशन देने का आदेश जारी करते हुए कहा था कि महिलाओं को युद्ध के सिवाय हर क्षेत्र में स्थायी कमीशन दिया जाए। हाई कोर्ट का यह आदेश लागू नहीं किया गया बल्कि इस आदेश को 9 साल बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर होने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि वो वास्तव में पुरुषों से ऊपर हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नेवी में स्थायी कमीशन देने में पुरुषों और महिलाओं का बराबर का हक है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि महिलाओं की शारीरिक क्षमता के मुताबिक उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि महिला अधिकारी उतनी ही क्षमता से नेवी में काम कर सकती हैं, जितने कि पुरुष। 

क्या है परमानेंट कमीशन? 
भारतीय सैन्य सेवा में महिला अधिकारियों की शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से भर्ती की जाती है। इसके बाद वे 14 साल तक सेना में नौकरी कर सकती हैं। इस अवधि के बाद उन्हें सेनानिवृत्त कर दिया जाता है। 20 साल तक नौकरी न कर पाने के कारण रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन भी नहीं दी जाती है। सेनाओं में परमानेंट कमीशन मिलने के बाद कोई अधिकारी रिटायरमेंट तक सेना में काम कर सकता है और उसे पेंशन भी मिलती​​ है।

सेना में अधिकारियों की कमी पूरी करने के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन शुरू हुआ था। इसके तहत पुरुषों और महिलाओं दोनों की भर्ती की जाती है, जिन्हें 14 साल में रिटायर कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती। परमानेंट कमीशन के लिए केवल पुरुष अधिकारी ही आवेदन कर सकते हैं। 

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