लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों पर जमने की तैयारी में लगे भारतीय सैनिक, प्रति माह खर्च होंगे 8,000 करोड़ रुपये

Daily Hunt News 16-09-2020 12:01:43

नई दिल्ली। लद्दाख सरहद पर चीनी सेना से लम्बी लड़ाई के लिए भारतीय सेनाओं की तैयारियां इन दिनों जोरों पर हैं। वायुसेना के परिवहन विमानों से सैनिकों की जरूरत का सामान लेह-लद्दाख पहुंचाया जा रहा है। आने वाली सर्दियों को देखते हुए जरूरी हथियार, राशन और साजो-सामान को अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने के लिए चिनूक हेलीकॉप्टर को लगाया गया है। बर्फबारी से रास्ते बंद होने पहले लद्दाख में हर सामान का स्टॉक किये जाने की योजना है। इसलिए भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक लगभग हर दिन बड़े सैन्य काफिले में लेह-लद्दाख पहुंच रहे हैं। हालांकि इससे पहले ठंड के दिनों में सड़कों को छह महीने के लिए बंद कर दिया जाता था लेकिन अब इस अवधि को घटाकर 120 दिन कर दिया गया है।  

Indo-China border dispute

भारत ने पिछले चार माह में द्विपक्षीय, सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के जरिये चीन से सीमा विवाद हल करने की हरसंभव कोशिश कर ली है लेकिन चीनियों के अड़ियल रुख को देखते हुए अब भारतीय सेना ने भी ठंड के दिनों में एलएसी पर जमे रहने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में बर्फबारी और भीषण ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए सेना ने एक साल के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक वस्तुओं का स्टॉक कर लिया है। याद रहे कि चीन ने सन 1962 का युद्ध अक्टूबर के महीने में ही शुरू किया था, इसलिए वार्ताओं के जरिये चार माह का समय बिताकर इस बार फिर चीन की तरफ से अक्टूबर में किसी भी तरह का दुस्साहस किये जाने की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। सैनिकों के लिए सामानों का स्टॉक करने में लगे सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि भारत एलएसी पर लम्बी तैनाती नहीं चाहता लेकिन अब ऐसी स्थिति बन रही है तो हम उसके लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। 

सेना ने किया राशन-ईंधन का स्टॉक
वायुसेना का परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर और अमेरिकी हेलीकॉप्टर चिनूक सेना तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।​ ​सी-17 ग्लोब मास्टर से सर्दियों के कपड़े, टेंट, हीटिंग उपकरण और राशन लेह-लद्दाख लाया जा रहा है। जो अनलोडिंग होने के बाद सेना के अधिकारियों की देखरेख में चिनूक हेलीकॉप्टरों के जरिये ऊंचाइयों की अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाया जा रहा है। एयर कमाडोर डीपी हिरानी ने कहा कि भारतीय सेना के लोकेशन पर ​​भेजे गए टेंट माइनस 50 डिग्री तक तापमान को झेलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय सेना के राशन गोदाम एलएसी माउंट पर भरे हुए हैं। लेह में सेना का ईंधन डिपो तेल टैंकर लाइन से भरा हुआ है।​ ​सेना ने राशन, गरम कपड़े, उच्च ऊंचाई वाले टेंट और ईंधन का भी बड़े पैमाने पर स्टॉक कर लिया है।

Indo-China border dispute
 
लेह स्थित 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर ने कहा कि हमारा लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर इतने स्मार्ट तरीके से बनाया गया है कि बाहर से किसी तरह की सूचना मिलते ही प्लग एंड प्ले मोड के तहत प्रभावी तरीके से यूनिट में शामिल हो सकते हैं। फ्रंटलाइन पर तैनात हर जवान को अत्याधुनिक शीतकालीन कपड़े और तंबू दिए गए हैं। सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले राशन का इंतजाम किया गया है, जो अत्यधिक पोषण और उच्च कैलोरी वाले हैं। सेना के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि भारत के पास ऐसे स्ट्रैटजिक एयरलिफ्ट प्लेटफॉर्म हैं, जिससे सड़क मार्ग कटने पर भी भारतीय सेना और एयरफोर्स मिलकर एक-डेढ़ घंटे के भीतर ही दिल्ली से लद्दाख और अग्रिम चौकियों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा सकता है। हालांकि इसी महीने रोहतांग टनल का भी उद्घाटन होने की उम्मीद है, जिसके बाद लद्दाख रीजन तक हर मौसम में पहुंच आसान हो जाएगी।

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