पाकिस्तान को UN में भारत ने लगाई लताड़, मानवाधिकार पर भाषण को लेकर कह डाली ऐसी बात

Daily Hunt News 16-09-2020 08:40:42

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर पाकिस्तान के कश्मीर में मानवाधिकार की दुहाई देने पर भारत ने उसे करारी फटकार लगाई है। भारत यूएन के मंच से साफ तौर पर पूरी दुनिया को संदेश दिया कि आतंकवाद के जन्मदाता और अपने यहां अल्पसंख्यकों को सताने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर देश से हमें मानवाधिकार के आदर्श सीखने की जरूरत नहीं है। भारत ने पाकिस्तान का समर्थन करने के लिए तुर्की को भी खूब खरी-खोटी सुनाई।

भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान को 'आतंकवाद का केंद्र' बताते हुए कहा कि इस्लामाबाद किसी को अकारण मानवाधिकार पर व्याख्यान न दे, क्योंकि उसने लगातार जातीय और हिंदुओं, सिखों और इसाईयों समेत अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया है।

दरअसल, मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र में पाकिस्तान की ओर से की गई टिप्पणी पर जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि झूठे और मनगढंत आरोप लगाकर अपने कुत्सित इरादों की पूर्ति करने के उद्देश्य से भारत को बदनाम करने की पाकिस्तान की आदत हो गई है।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत इंद्रमणि पांडे ने कहा, भारत ही नहीं, दुनिया का कोई भी देश किसी ऐसे देश से मानवाधिकार पर भाषण नहीं सुनना चाहेगा, जो अपने जातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार सताता हो। 

उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकियों को पेंशन देने में गर्व महसूस करने वाले पाकिस्तान के पास ऐसा प्रधानमंत्री है, जो जम्मू-कश्मीर में लड़ने के लिए हजारों आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने की बात स्वीकारने को गौरव का विषय मानता है। 

उन्होंने तुर्की को भी कश्मीर पर टिप्पणी करने के लिए स्पष्ट चेतावनी दी। भारतीय मिशन के प्रथम सचिव ने कहा कि मैं फिर से तुर्की को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से परहेज करने की सलाह देता हूं।

भारतीय राजनयिक ने कहा कि न ही भारत को और न ही किसी अन्य को मानवाधिकार पर एक ऐसे देश से आख्यान सुनने की जरूरत है जो लगातार अपने जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करता रहा हो। यह आतंकवाद का केंद्र है, संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों की सूची में शामिल लोगों को पेंशन देने की इस देश की विशेषता है और इस देश के प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ जम्मू-कश्मीर में लड़ाई के लिए हजारों आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने की बात स्वीकारी है।

वहीं, भारत ने मंगलवार को कहा कि पड़ोसी देश द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को घुसपैठ कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लगातार कोशिशों के बावजूद उसने जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया है और यहां सामाजिक और आर्थिक विकास को गति दी है।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को 2019 में खत्म किए जाने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस बदलाव की वजह से केंद्रशासित क्षेत्र के लोग उन्हीं मूलभूत अधिकारों को हासिल कर रहे हैं, जो अधिकार भारत के अन्य हिस्सों के लोगों के लिए हैं।

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