हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना से दिल्ली के रेल नेटवर्क पर कम होगा दबाव

Daily Hunt News 15-09-2020 21:55:00

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पलवल को सोनीपत से जोड़ने वाली 121 किलोमीटर लंबी हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दे दी। परियोजना की अनुमानित लागत 5,617 करोड़ है और इसके पांच साल में पूरा होने की संभावना है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने पलवल से सोनीपत-सोहना-मानेसर-खरखौदा होते हुए हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना को अपनी मंजूरी दे दी। यह रेल लाइन पलवल से शुरू होकर मौजूदा हरसाना कलां स्टेशन (दिल्ली-अंबाला सेक्शन पर) पर समाप्त होगी। इससे मौजूदा पातली स्टेशन (दिल्ली-रेवाड़ी लाइन पर), सुल्तानपुर स्टेशन (गढ़ी हरसरू-फारुखनगर लाइन पर) और असौधा स्टेशन (दिल्ली रोहतक लाइन पर) के लिए कनेक्टिविटी दी जाएगी। 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि परियोजना को हरियाणा सरकार के साथ रेल मंत्रालय द्वारा स्थापित संयुक्त उद्यम कंपनी हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचआरआईडीसी) द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा। इससे दिल्ली के लिए न जाने वाले वाहनों के मार्ग को परिवर्तित (डायवर्ट) करने में मदद मिलेगी और एनसीआर हरियाणा राज्य के उप-क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने में मदद मिलेगी। दिल्ली को बाईपास करते हुए पलवल से सोनीपत तक ऑर्बिटल रेल गलियारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सतत विकास और दिल्ली क्षेत्र में मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क पर दबाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। 

इस परियोजना का क्षेत्र वेस्टर्न पेरिफेरल (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेसवे से सटा हुआ है और यह कुछ समय से विचाराधीन था। इस परियोजना में दिल्ली से निकलने वाले सभी मौजूदा रेलवे मार्गों और हरियाणा राज्य के साथ-साथ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क से गुजरने वाले मार्गों के साथ कनेक्टिविटी होगी। 

परियोजना का कार्यान्वयन हरियाणा सरकार के साथ रेल मंत्रालय द्वारा स्थापित एक संयुक्त उद्यम कंपनी हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचआरआईडीसी) द्वारा किया जाएगा। इस परियोजना में रेल मंत्रालय, हरियाणा सरकार और निजी हितधारकों की संयुक्त भागीदारी होगी। परियोजना में निर्माण कार्य की अनुमानित लागत 5617 करोड़ रुपये है। इससे दिल्ली के लिए न जाने वाले वाहनों के मार्ग को परिवर्तित (डायवर्ट) करने में मदद मिलेगी और एनसीआर हरियाणा राज्य के उप-क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे इस क्षेत्र को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क से उच्च गति वाली बाधारहित कनेक्टिविटी मिल सकेगी जिसके परिणामस्वरूप एनसीआर से भारत के बंदरगाहों तक एक्जिम यातायात के लिए परिवहन की लागत और समय में कमी आएगी और इससे माल का निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। अन्य पहलों के साथ इस कुशल परिवहन गलियारे के परिणामस्वरूप बहुराष्ट्रीय उद्योगों को 'मेक इन इंडिया' मिशन को पूरा करने के लिए विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।

यह परियोजना हरियाणा राज्य के नजरअंदाज किए गए क्षेत्रों को जोड़ेगी, जिससे हरियाणा राज्य में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस बहुउद्देशीय परिवहन परियोजना से सस्ती और तेज गति से यात्रा करने में आसानी होगी और गुरुग्राम से विभिन्न दिशाओं में लंबी दूरी की यात्रा की जा सकेगी और मानेसर, सोहना, फरुखनगर, खरखौदा और सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्रों में माल ढुलाई की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना में लगभग 76.30 लाख मानव दिवसों का रोजगार भी सृजित किया जाएगा।

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