पूर्व सेनाध्यक्ष ने LAC झड़प को लेकर किया बड़ा खुलासा, बताया क्या था विवाद उत्पन्न होने का असली कारण

Daily Hunt News 30-06-2020 05:47:00

नई दिल्ली। बीती 15 जून की रात लद्दाख की गलवान घाटी में जो हिंसक झड़प हुई थी उसे लेकर अब केन्द्रीय मंत्री और पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीके सिंह ने दावा किया है कि गलवान घाटी में जो हिंसक झड़प हुई थी, वह एक चीनी टेंट में रहस्यमयी तरीके से आग लगने के कारण हुई थी। 

वीके सिंह के मुताबिक, चीनी टेंट में आग लगने के बाद ही दोनों सेनाओं में तीखी हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारतीय सेना की 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिग अफसर कर्नल संतोष बाबू समेत 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इस झड़प में चीन के भी 40 से ज्यादा सैनिकों के मारे जाने की खबर आई थी। हालांकि चीन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

Indo-China border dispute

एक न्यूज चैनल से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा, 'भारत और चीन के बीच जो बातचीत हुई थी, उसमें फैसला हुआ था कि सीमा के पास से दोनों देशों के सैनिक वापस जाएंगे और कोई भी वहां मौजूद नहीं रहेगा। जब 15 जून को भारतीय सेना के कमांडिंग अफसर अन्य सैनिकों के साथ शाम को देखने गए कि चीनी सैनिक वापस गए हैं या नहीं। पता चला कि वे वहां से नहीं गए हैं।' 

वीके सिंह ने कहा, 'इसके बाद वहां जब तंबू देखा गया तो दोनों देशों के बीच झड़प हो गई। चीनी सैनिक तंबू हटाने लगे तो उसमें आग लग गई। हालांकि, यह नहीं पता चल सका कि उस तंबू में क्या रखा हुआ था। इसी को लेकर दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक टकराव हो गया।'

Indo-China border dispute

बता दें कि गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच एलएसी पर तनाव पहले के मुकाबले अधिक बढ़ गया है। भारत ने  नियंत्रण रेखा पर माउंटेन कार्प के एकीकृत बैटल ग्रुप (आईबीजी) की तैनाती की है। इस ग्रुप में शामिल जवान ऊंचे पहाड़ी इलाकों में युद्ध करने में पारंगत हैं। ये समूह खासतौर पर ऊंचे पर्वतीय इलाकों में युद्ध के लिए प्रशिक्षित किए जाते हैं। ये 17वीं माउंटेन कार्प के जवान हैं जिन्हें युद्धक समूहों के रूप में चीन से निपटने के लिए खासतौर पर तैयार किया गया है। यह समूह चीन की हर चुनौती से निपटने में सक्षम है।

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