मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन नहीं दी जानी चाहिए: हिंदू महासभा

Daily Hunt News 09-12-2019 21:16:00

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। वर्षों से चले आ रहे इस मामले की अंतिम सुनवाई 40 दिनों में पूरी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस ऐतिहासिक मामले में पहले मध्यस्थता का रास्ता अपनाने को कहा गया था, लेकिन ये सफल नहीं हो सका था। शीर्ष अदालत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि 2.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने के भी निर्देश हैं।

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 वही आज बड़ी खबर हैं अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोमवार को हिंदू पक्ष की तरफ से पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से वकील विष्णु शंकर जैन ने यह याचिका दायर की। हिंदू महासभा ने वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन के जरिये अपनी याचिका दाखिल की। इसमें पांच सदस्यीय संविधान पीठ के नौ नवंबर के फैसले में लिखी उस टिप्पणी को भी हटाने का अनुरोध किया है जिसमें कोर्ट ने यह कहते हुए मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया कि वहां पर मस्जिद थी। 

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जबकि उपलब्ध साक्ष्यों व प्रमाणों के आधार पर कोर्ट ने ही कहा है कि मुस्लिम पक्ष वहां पर मस्जिद होने का सुबूत पेश करने में नाकाम रहा।  हिन्दू महासभा का कहना है कि विशेष पीठ ने अपने फैसले में माना है कि विवादित जमीन के अंदरूनी हिस्से और बाहरी हिस्से पर हिंदुओं का दावा मजबूत है। ऐसे में मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन नहीं दी जानी चाहिए। जानकारी के लिए बता दें जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का मामला कई वर्षों से चला आ रहा है। इस मामले की अंतिम सुनवाई 40 दिनों में पूरी हुई है। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों ने तीखी बहस की। 

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