BCCI और ICC में छिड़ी मीडिया अधिकार जंग, विश्व कप...

Daily Hunt News 15-10-2019 01:33:00

नई दिल्ली। BCCI के नए पदाधिकारियों को जल्दी ही ICC के साथ द्वंद्व का सामना करना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि उसके प्रस्तावित भावी दौरों के कार्यक्रम (एफटीपी) का भारतीय क्रिकेट बोर्ड के राजस्व पर विपरीत असर पड़ सकता है। नए प्रस्ताव में हर साल टी-20 विश्व कप कराने और 50 ओवरों का विश्व कप तीन साल में एक बार कराने की पेशकश है। इसके जरिये आईसीसी 2023-2028 की अवधि के लिए वैश्विक मीडिया अधिकार बाजार में प्रवेश करना चाहती है, ताकि उसे स्टार स्पोटर्स जैसे संभावित प्रसारकों से राजस्व का मोटा हिस्सा मिल सके। सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाले बीसीसीआई के सामने यह बड़ी चुनौती होगी।

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एफटीपी वह कैलेंडर है जो आईसीसी और सदस्य देश अलग-अलग 5 साल की अवधि के लिए बनाये जाते हैं, जिसके तहत द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेले जाते हैं। 2023 के बाद की अवधि के लिए प्रस्तावित मसौदे पर हाल ही में ICC मुख्य कार्यकारियों की बैठक में बात की गई। BCCI सीईओ राहुल जौहरी ने साफ तौर पर आईसीसी सीईओ मनु साहनी को ईमेल में कहा कि यह फैसला कई कारणों से सही नहीं होगा। सौरव गांगुली के BCCI अध्यक्ष बनने को लेकर ममता बनर्जी ने किया ये ट्वीट बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि चुनाव होने के बाद बोर्ड अब इस मामले में सख्त कदम उठाएगा। 

उन्होंने कहा, ''मान लीजिये कि स्टार स्पोटर्स या सोनी का टीवी, रेडियो, डिजिटल प्रसारण अधिकार का सौ करोड़ रुपए का बजट है। इसमें दो अहम पक्ष आईसीसी और बीसीसीआई हैं। बीसीसीआई के पास आईपीएल और द्विपक्षीय सीरीज (पाकिस्तान के अलावा) हैं।'' उन्होंने कहा, ''हर साल टी20 विश्व कप कराना रोमांचक है और यदि आईसीसी बाजार में पहले पहुंचता है तो राजस्व का बड़ा हिस्सा उसके खाते में जाएगा।'' अधिकारी ने कहा, ''प्रसारक यदि 2023-2028 की अवधि के लिए आईसीसी अधिकार खरीदने पर 60 करोड़ रूपये खर्च करता है तो बीसीसीआई के बाजार में उतरने पर उसके पास 40 करोड़ रूपये ही बचे रहेंगे। इससे बीसीसीआई का राजस्व घट जाएगा।''

राहुल जौहरी ने ईमेल में कहा, ''बीसीसीआई 2023 के बाद आईसीसी टूर्नामेंटों और प्रस्तावित अतिरिक्त आईसीसी टूर्नामेंटों पर ना तो सहमति जताता है और ना ही पुष्टि करता है।'' उन्होंने कहा, ''इसके अलावा बीसीसीआई को द्विपक्षीय सीरीज के अपने करार भी पूरे करने है। वहीं इस मसले पर कार्यसमूह (सदस्य बोर्डों के सीईओ) की राय नहीं ली गई तो एकतरफा फैसला अपरिपक्व होगा और इसके यह भी मायने है कि सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।''

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