ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 5 (भाग-1), ऐतिहासिक सम्मेलन

Daily Hunt News 13-10-2019 08:29:13

डेस्क। ताहिरा के अचानक रहस्मय ढंग से गायब हो जाने से उनके शत्रुओं को जहाँ भय से भर दिया, वहीं उनके मित्रों को चिंता से। अधिकारियों ने उस रात हर घर में तलाशी ली। वे क्रोधित थे उनके गायब हो जाने से और उनके कथन के पूरा होने से। इस बीच ताहिरा राजधानी में थीं। वहाँ पर प्रभुधर्म का शिक्षण करते हुये और फारस के अन्य हिस्सों से आये बाब के अनुयायियों से मिलते हुए प्रसन्नता के दिन गुजारे।

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निश्चितंता के दिन समाप्त हो गये जब यह सूचना आई कि बाब के अनुयायी खुरासान में बदश्त में एकत्रित हो रहे थे। ताहिरा ने दल के साथ जाने के लिये एकाएक शहर छोड़ दिया। उनके शत्रु अभी भी रास्ते भर उनकी खोज में लगे हुये थे, लेकिन उन्होंने वेश बदलकर तेहरान से बदश्त की यात्रा की।

यह 1848 की गर्मी के प्रारंम्भ का समय था, जब बाब के 81 मुख्य अनुयायी बदश्त में परामर्श करने के लिये एकत्रित हुए थे, क्योंकि यह तबरसी के किले की घटना के पूर्व की बात थी। उपस्थित लोगों में कुद्दुश भी थे।

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इस सम्मेलन का दोहरा उद्देश्य था। पहला उद्देश्य तो यह था कि कौन से कदम उठाये जाये जिससे बाब का धर्म इस्लाम के एक टुकड़े की भांति नहीं बल्कि एक नये स्वतंत्र धर्म की भाँति देखा जाये, जिसका अपना अवतार और अपने लेख हों। 

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दूसरा उद्देश्य बाब को चिहरिक में उनके कारावास से मुक्त कराने के तरीकों के विषय में सोचने के लिये। सम्मेलन अपने प्रथम उद्देश्य में सफल हुआ, लेकिन दूसरे उद्देश्य को प्राप्त करने में असफल रहा। बाब के अनुयायी इस बात के लिये इच्छुक थे कि समयसंगत नहीं रहे धार्मिक विधानों से पूरी तरह अलग हो जायें और ताहिरा स्वयं इस अलगाव का साधन बनें। वह इसकी एक प्रतीक बनें।

 

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