नवरात्रि की नवमी पर पुलिस एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई पशु बलि, लोगों की है ऐसी अनोखी मान्यता

Daily Hunt News 07-10-2019 20:46:32

चित्तौडग़ढ़। राजस्थान में पशु बलि पर रोक के बावजूद चित्तौडग़ढ़ जिले में एक शक्तिपीठ पर प्रतिवर्ष की भांति नवरात्रि की नवमी पर आज पुलिस एवं हजारों लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पशु बलि दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है।

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प्राप्त जानकारी अनुसार जिले के आकोला थाना क्षेत्र के ताणा गांव स्थित पहाड़ी पर अवस्थित चामुंडा माता मंदिर पर प्रतिवर्ष की भांति सोमवार को भी ताणा के ठाकुर और भूपालसागर पंचायत समिति के उपप्रधान भीमसिंह झाला के परिवार की ओर से पशु बलि के आयोजन के तहत एक भैंसे की मंदिर के सामने बलि दी गई। इस मौके पर बडी संख्या में लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुए इस बलि के आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मी भी बने लेकिन परम्परा एवं ठाकुर परिवार के खौफ के चलते इन्होंने बलि रोकने के कोई प्रयास नहीं किये।

थानाधिकारी रमेश मीणा ने बताया कि वहां इस तरह की परम्परा का उन्होंने भी सुना है, लेकिन आज वह कपासन में ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि मंदिर पर हजारों लोगों की उपस्थिति में कानून व्यवस्था नियंत्रण के लिए आकोला थाने के सहायक थानाधिकारी जगदीश विजयवर्गीय के साथ तीन जवान आकोला थाने से एवं दो जवान कपासन थाने से लगवाए गये थे जिनसे इसकी रिपोर्ट ली जाएगी।

जिला कलेक्टर चेतनराम देवड़ा एवं पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल के संज्ञान में पशु बलि का मामला लाए जाने पर जांच करवाने के निर्देश दिये हैं, दोनों ही अधिकारियों ने मामला गंभीर बताया है। सूत्रों ने बताया कि मान्यता है कि बलि के बाद सिर कटा भैंसा अगर चार सौ फीट की पहाड़ी से लुढक़ता हुआ नीचे तक आ जाता है तो अगले वर्ष क्षेत्र में अच्छी बरसात होगी और यदि बीच में ही अटक जाता है तो यह अच्छी बरसात नहीं होने का संकेत माना जाता है।

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