सीताराम येचुरी को याद आई मां दुर्गा, ट्विटर पर लोगो ने किये ऐसे-ऐसे कमेंट्स

Daily Hunt News 07-10-2019 15:25:33

धर्म को अफीम बताने वाली माकपा के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी की पार्टी जब पश्चिम बंगाल में अस्तित्व खो चुकी है तब उन्हें मां दुर्गा की याद आने लगी है। धर्म को लोगों के जीवन में सबसे अनुपयोगी बताने वाले येचुरी ने अष्टमी के दिन नवमी और दशमी की शुभकामनाएं दी थी। इसके बाद से लोग उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं।

रविवार को येचुरी ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था कि महानवमी, दशहरा और विजयादशमी के त्योहारों की सभी को बधाई। बुराई पर अच्छाई की जीत हो। इसके बाद सोमवार तक हजारों लोगों ने उनके ट्वीट को रिट्वीट कर कमैंट्स और आलोचनाएं करना शुरू किया है। एक यूजर ने लिखा कि कॉमरेड येचुरी मैं वास्तव में सदमे में हूं। लेनिन, स्टालिन और मार्क्स की आत्माएं आज क्या कहेंगी? सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि धर्मनिरपेक्ष सबसे अधिक मुश्किल में पड़ गए होंगे।

एक दूसरे यूज़र में लिखा कि सीताराम येचुरी अच्छी बात है कि आप अब हिंदू धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आखिर सबको आना यहीं है लेकिन आपको याद रखना होगा कि दुर्गा अष्टमी को नवमी की शुभकामनाएं नहीं दी जाती। दशमी और विजयदशमी दुर्गा पूजा बीत जाने के बाद जब मूर्तियों का विसर्जन हो जाता है तब मनाया जाता है। अभी जबकि मूर्तियां विभिन्न घरों और पूजा पंडालों में हैं, तब यह विजय की शुभकामना नहीं दी जाती।एक अन्य यूजर ने लिखा कि विजयदशमी तो रावण जैसे महा राक्षस के वध के बाद मां सीता के मुक्ति के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वामपंथियों को तो रामायण पर भरोसा ही नहीं है। फिर इस ट्वीट का क्या मतलब है? क्या बंगाल के लोगों ने आपको खत्म कर आईना दिखाया है इसलिए प्रायश्चित कर रहे हैं?

येचुरी ने कुछ महीने पहले बयान दिया था कि रामायण और महाभारत भी लड़ाई और हिंसा से भरी हुई थीं। उनके इस बयान की हिंदू संगठनों ने कड़ी निंदा की थी।

हालांकि उनके ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स जमकर मजे लेने लगे। एक ट्विटर यूजर रविंद्र ने ट्वीट कर लिखा, ‘क्या बात है कॉमरेड, किस क्षेत्र में चुनाव हैं?’ रवि कृष्णामूर्ति लिखते हैं, ‘नास्तिकों ने पूजा शुरू कर दी। नमो जय।’ मोनू चौबे लिखते हैं, ‘जोर से बोलो जय सियाराम।’ इसी तरह मनीष सनसाइन सीपीआई नेता पर तंज कसते हुए लिखते हैं, ‘इसको कहते हैं…मोदी है तो मुमकिन है।’

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