पुलवामा शहीदों के परिवारों से किया वादा तोड़ दी सरकार, 40 में से सिर्फ 12 को नौकरी की पेशकश

Daily Hunt News 07-10-2019 13:32:04

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का दावा है कि वो देश की सेना के सबसे बड़ी हितैषी है. लेकिन अब आईटीआई से हुए एक ख़ुलासे ने उनके इस दावे की पोल खोल दी है. दरअसल, गृह मंत्रालय से मिले आरटीआई के एक जवाब से इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों में से सिर्फ 12 के परिवारों को ही नौकरी की पेशकश की गई है, वह भी सिर्फ राज्य सरकारों द्वारा. केंद्र सरकार की तरफ से संबंध में कोई पेशकश नहीं की गई है.

आरटीआई से हुए इस ख़ुलासे को हिंदी न्यूज़ पोर्टल ‘नवजीवन’ ने प्रकाशित किया है. पोर्टल के मुताबिक, जिन 12 परिवारों को नौकरी की पेशकश हुई है, उनमें से 9 उत्तर प्रदेश की हैं, जबकि एक जवान का परिवार केरल में और एक का असम में रहता है. इसके अलावा पुलवामा हमले के 36 घंटे के भीतर ही ‘वीर भारत कोर’ फंड में करीब 7 करोड़ रुपए जमा हो गए थे. वैसे इस फंड में अगस्त 2019 तक 258 करोड़ रुपए जमा थे.

बता दें कि इसी साल फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए थे. इस हमले को केंद्र सरकार की मोदी सरकार ने अपनी चुनावी रैलियों में जमकर भुनाने की कोशिश की थी और वादा किया था कि सरकार पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों की हर संभव मदद करेगी.

लेकिन अब आरटीआई से हुए ख़ुलासे से ये साबित हो गया है कि मोदी सरकार ने शहीदों और उनके परिवारों को न तो कोई पर्याप्त मुआवजा दिया, और न ही सभी 40 जवानों के परिजनों को नौकरी मिली.

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