जिस ने तोडा था राम मंदिर, उसी के ही वंशज निर्माण के लिए आए आगे, कहा- नींव के लिए हम रखेंगे पहली ईंट

Daily Hunt News 18-08-2019 16:12:48

हैदराबाद। वक़्त वक़्त का फेर शायद इसे ही कहते हैँ। मुगल बादशाह बाबर के आदेश पर अयोध्या में जिस राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया गया था, अब उसी स्थान पर राम मंदिर के निर्माण के लिए बाबर के ही वंशज आगे आए हैं। 

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भारत में अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर के वंशज याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर बनने की इच्छा जताते हुए कहा कि ऐसा होने पर हमारा परिवार उसकी पहली ईंट तो रखेगा ही, साथ ही मंदिर की नींव के लिए सोने की शिला भी दान देंगे। हाल ही में तुसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस का पक्षकार बनाने की भी मांग की थी। हालांकि तुसी की इस याचिका को कोर्ट ने अब तक स्वीकार नहीं किया। 

शनिवार को हमारे एक अखबार को दिए एक इंटरव्यू में तुसी ने कहा कि जिस जमीन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है, उसके मालिकाना हक के कागज किसी और के पास नहीं हैं ऐसे में मुझे यह अधिकार है कि मैं मुगल वंश का वंशज होने की हैसियत से अदालत में अपनी बात कर सकूं। तुसी ने कहा कि मैं इस मामले में पर अपना विचार रखना चाहता हूं कि विवादित जमीन का मालिकाना हक किसे मिले और मेरी मांग है कि एक बार ही सही मुझे सुना जाना चाहिए। 

तुसी ने कहा कि 1529 में प्रथम मुगल शासक बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह स्थान सिर्फ सैनिकों के लिए था और किसी के लिए नहीं। मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि मस्जिद से पहले यहां क्या था, लेकिन अगर हिंदू उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानकर उसमें आस्था रखते हैं तो एक सच्चे मुस्लिम की तरह मैं उनकी भावना का सम्मान करूंगा।

इस सवाल पर कि क्या उनके पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े कोई दस्तावेज हैं, तुसी ने कहा कि उनके पास भले ही कोई कागज ना हो, लेकिन मुगल वंश के उत्तराधिकारी की हैसियत से वह इस जमीन के मालिकाना हक के अधिकारी कहे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह जमीन मिलती है तो वह इसे मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे। 

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट बीते कई दिनों से नियमित रूप से अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहा है। अयोध्या का यह पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन को लेकर है और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं। 

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