महाभारत काल में बना था चौपेश्वर शिवमंदिर, जानिए इतिहास

Daily Hunt News 20-07-2019 14:51:40

हमीरपुर। बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले का राठ नगर महाभारत काल से जुड़ा है। यह महाराजा विराट की राजधानी 'विराट नगर' के नाम से भी जाना जाता रहा है। यहां महाराज विराट ने अपनी बेटी उत्तरा के लिए चौपेश्वर शिव मंदिर का निर्माण कराया था। सावन के महीने में इस ऐतिहासिक मंदिर को खूब सजाया गया है।

हमीरपुर जिला मुख्यालय से करीब 85 किमी दूर दक्षिण दिशा में स्थित राठ नगर आज भी अपने अतीत और वैभव को संजोये हुए है। बताया जाता है कि यहां बने चौपेश्वर शिव मंदिर में खाकी बाबा के नाम से एक संत ने डेरा डाला था। किसी जमाने में यज्ञ का आयोजन हुआ था और अगले दिन भंडारा था। तब पूड़ी बनाने के लिए घी कम पड़ने पर संत ने चौपेश्वर मंदिर के तालाब से पानी निकालकर कढ़ाई में डालने को कहा था, जो घी में बदल गया था। बाद में संत के कहने पर एक डब्बा शुद्ध घी तालाब में डलवाया गया था।

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हजारों साल पुराना है राठ नगर का इतिहास
इतिहासकार राकेश त्रिपाठी के मुताबिक 12 साल का अज्ञातवास बिताने के लिए पांच पाण्डवों ने महाराज विराट की नगरी राठ को ही चुना था। पाण्डवों ने अपने सभी शस्त्र नगर के बाहर एक विशाल वृक्ष पर छिपा दिए थे। युधिष्ठर राजा विराट के सभासद और भीम रसोईयां बने थे। नकुल घुड़साल की देखरेख करते थे, जबकि सहदेव महाराजा की गायों की सेवा करते थे। अर्जुन बृहन्नला बनकर नृत्य करते थे। बताते हैं कि अर्जुन महाराज विराट की बेटी उत्तरा को नृत्य भी सिखाते थे। पाण्डवों की मां द्रोपदी को महारानी की दासी बनना पड़ा था।

चौपेश्वर मंदिर के दर्शन से पूरी होती है मुरादें
राठ बस स्टैण्ड से 1.8 किमी दूर नगर से पूर्व की ओर स्थित चौपेश्वर मंदिर में भगवान शंकर का भव्य शिवलिंग स्थापित है। इस प्राचीन मंदिर में हनुमानजी, रामलला और भगवान गणेश जी के भी मंदिर है। कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से मुरादें पूरी होती हैं।

चौपरा तालाब पर उत्तरा सीखती थी नृत्य
चौपेश्वर मंदिर के पास एक प्राचीन तालाब है जिसे चौपरा तालाब के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि अज्ञातवास में अर्जुन ने राजकुमारी उत्तरा को इसी तालाब के तट पर नृत्य सिखाते थे। वर्तमान में प्रशासनिक उदासीनता के कारण तालाब के चारों ओर अतिक्रमण हो गया है।

बारह खंभा में लगता था महाराज का दरबार
राठ नगर के पश्चिम दिशा की ओर नर्सरी परिसर के अंदर बारह खंभों का एक आयताकार बरामदा जैसा भवन बना है। साथ ही मझगवां रोड में भी बारह खंभों का आयताकार बरामदा बना है। इसे बारह खंभा चौराहा भी कहा जाता है। खास बात तो यह है कि आयताकार बारह खंभा के निर्माण में न तो सीमेंट का इस्तेमाल किया गया और न ही गारा का प्रयोग किया गया है।

ध्रुपकली तालाब में हुआ था कीचक का वध
महोबा रोड पर मिशन स्कूल के सामने ध्रुपकली तालाब है, जो मौजूदा समय में अंतिम सांसे गिन रहा है। यह गंदगी से पटा हुआ है। बताते है कि अज्ञातवास के समय महाराजा विराट की रानी की सेवा में जब द्रोपदी लगी थी तब महारानी के भाई कीचक ने द्रोपदी को छेड़ दिया था। द्रोपदी की अस्मत पर हाथ डालने पर भीम ने क्रोधित होकर कीचक को इसी तालाब के किनारे मौत के घाट उतार दिया था। नगर के बुधौलियाना में आज भी कीचक की समाधि दानू मामा के चबूतरा नाम से जानी जाती है।

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