आजीवन कारावास पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट राय चाहती है ममता बनर्जी सरकार

Daily Hunt News 7/10/2019 10:53:53 PM

कोलकाता। आजीवन कारावास की अवधि के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट राय जानने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने याचिका लगाई है। बुधवार को यह जानकारी राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश की वजह से आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की मुक्ति कब की जा सकती है इस बारे में धुंध है। इसे समझने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका लगाई गई है। 

दरअसल विधानसभा के सत्र के दौरान माकपा विधायक प्रदीप साहा ने कहा कि पहले हर साल स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को कैदियों के अच्छे आचरण और अन्य समीक्षा के जरिए मुक्त किया जाता था, लेकिन पिछले कई सालों से ऐसा नहीं हुआ है। ऐसा क्यों? इसके जवाब में राज्य के कारागार मंत्री उज्जवल विश्वास ने कहा कि जो लोग 14 सालों से अधिक समय से जेलों में बंद हैं उन्हें रिहा करने के लिए एक समीक्षा कमेटी है। बेहतर आचरण वाले कैदियों को मुक्त संशोधनागार में भेज दिया जाता है। राज्य सरकार ने ऐसे चार संशोधनागार बनाए हैं। 

वहां सुबह सात बजे से रात आठ बजे तक कैदियों को रिहा किया जाता है। विगत तीन सालों में पश्चिम बंगाल सरकार ने विभिन्न जेलों में बंद 400 कैदियों की सूची बनाई है जिन्हें ऐसे मुक्त संशोधनागारों में भेजा जाना है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से कैदियों की रिहाई को लेकर संशय की स्थिति बनी है। इसकी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट की राय के अनुसार किसी भी कैदी को रिहा करने के लिए कैदियों के निवास वाले संबंधित थाना से लिखित अनुमति की जरूरत पड़ती है। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सदन में खड़ी हुईं। उन्होंने कहा कि यह सच है कि कैदियों की रिहाई के लिए एक रिव्यू कमेटी है लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की वजह से समस्या हो रही है। 

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इसीलिए हमलोगों ने एक याचिका लगाई है जिसमें हमने जानना चाहा है कि आजीवन कारावास की सजा कितने साल की हो सकती है? क्या इसका मतलब सारा जीवन जेल में रखना है या किसी तय समयावधि के बाद कैदियों को रिहा किया जा सकता है? इसके बाद कांग्रेस विधायक असित मित्रा ने कहा कि मुझे जानकारी मिली है कि पश्चिम बंगाल की विभिन्न जेलों में 283 ऐसे बांग्लादेशी कैदी हैं जिन्हें लौटाने के बजाय जेलों में रखा गया है। इसके जवाब में कारागार मंत्री उज्जवल विश्वास ने कहा कि दरअसल बांग्लादेश की सरकार इन कैदियों को वापस लेने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। 

बावजूद इसके करीब 100 कैदियों को उनके देश वापस लौटाया गया है। इसके अलावा उज्जवल विश्वास ने बताया कि राज्य सरकार ने बांग्लादेश सीमा से सटे बनगांव में एक संशोधनागार बनाने का निर्णय लिया है जहां ऐसे कैदियों को रखा जाएगा। इसके बाद तृणमूल विधायक नरगिस बेगम ने पूछा कि राज्य में ऐसी कितनी जेल हैं जहां वीडियो निगरानी की जाती है? इसके जवाब में कारागार मंत्री ने कहा कि राज्य में 60 संशोधनागारों में से 56 में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 

इसके बाद कांग्रेस विधायक दल के उपनेता नेपाल महतो ने आरोप लगाया कि राज्य भर की जेलों में कई ऐसे गरीब कैदी बंद है जिनके पास अपना वकील करने के लिए रुपये नहीं हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं मिल रही। सालों से ऐसे कैदियों को जेलों में बंद रखा गया है। हालांकि कारागार मंत्री उज्जवल विश्वास ने नेपाल महतो के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है।

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