खेती नहीं करना चाहते सिंगूर के किसान : ममता

Daily Hunt News 7/10/2019 5:33:10 PM

कोलकाता। हुगली जिले के जिस सिंगूर में किसानों की जमीन को टाटा की नैनो परियोजना के लिए अधिग्रहण से रोकने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने व्यापक आंदोलन किया था उस जमीन पर अब वहां के  किसान खेती करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।‌ बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सवाल का उत्तर देते हुए उक्त स्वीकारोक्ति की। 

विधानसभा में माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने पूछा था कि सिंगुर के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य सरकार ने क्या किया है? क्या उनकी खेती बढ़ी है? इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से जीत मिलने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगूर के अधिकतर किसानों को उनकी जमीन लौटा दी है लेकिन वहां के अधिकतर किसान खेती करने को इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में राज्य सरकार क्या कर सकती है। उन्होंने कहा कि सिंगुर के किसानों को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार कोशिश कर रही है। वहां स्वाइल टेस्ट भी किया गया है।

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माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने पूछा कि कृषि विभाग ने सिंगुर के किसानों की भलाई के लिए क्या क्या कदम उठाया है? इसके जवाब में कृषि मंत्री आशीष बनर्जी ने कहा कि धान, गेहूं, मक्का जैसी फसलों का उत्पादन हो रहा है। वहां कोई जमीन खाली नहीं पड़ी है। हालांकि आशीष बनर्जी के इस जवाब के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि सिंगुर में अभी भी 42 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। उसके मालिक के बारे में पता नहीं लग सका है। मैंने भूमि सुधार और राजस्व विभाग को निर्देश दिया है कि खाली पड़ी जमीन के मालिक का पता लगाकर जल्द से जल्द यह जमीन उन्हें आवंटित की जाए। उन्होंने कहा कि सिंगुर क्षेत्र में कोई भी जमीन खाली नहीं रखी जाएगी। 

दरअसल सिंगूर के किसानों का आरोप है कि नैनो परियोजना के लिए अधिग्रहित  की गई जमीन अब  खेती लायक नहीं बची है। इसलिए क्षेत्र में एक बार फिर उद्योग स्थापित करने की मांग तेज हो गई है। हुगली जिले से जीत दर्ज करने वाली भाजपा की सांसद और प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष लॉकेट चटर्जी ने किसानों को आश्वस्त किया है कि सिंगूर में उद्योग स्थापित करने के लिए वह कोशिश करेंगी। इस बार लोकसभा चुनाव में सिंगुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस को बहुत कम वोट मिले थे जिसकी वजह से सत्तारूढ़ पार्टी काफी चिंता में पड़ी हुई है।

 क्यों खास है सिंगुर - 
तृणमूल कांग्रेस के लिए सिंगुर बेहद खास है। यही वह जगह है जहां से ममता बनर्जी ने मजबूत विपक्षी नेत्री के तौर पर आंदोलन किया था और राज्य की सत्ता पर आसीन होने का उनका रास्ता साफ हुआ था। 2006 में हुगली जिले के सिंगुर में टाटा मोटर्स के नैनो कारखाने के लिए बंगाल की तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने 997.11 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। कुछ किसान जमीन देने के इच्छुक नहीं थे। उनसे जबरन उनकी जमीन ली गई थी। 400 एकड़ जमीन लौटाने की मांग पर ममता बनर्जी ने आंदोलन शुरू किया था। सिंगूर को लेकर ममता ने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर 26 दिनों तक अनशन भी किया था। 

सिंगुर क्षेत्र में किसानों के व्यापक और हिंसक आंदोलन तथा राज्य में विपक्ष के भारी विरोध के कारण 23 सितंबर, 2008 को टाटा ने कारखाने को सिंगुर से गुजरात शिफ्ट करने का फैसला किया, हालांकि जमीन लौटाने को लेकर अदालत में मामला चला।

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आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर, 2016 को अनिच्छुक किसानों की जमीन लौटाने का फैसला सुनाया। उसके बाद खुद मुख्यमंत्री सिंगुर गई थीं और उन्होंने किसानों को अपने हाथों से जमीन का पट्टा वितरित किया। लेकिन अब उस क्षेत्र के किसान खेती नहीं करना चाहते। किसानों का कहना है कि अगर यहां उद्योग स्थापित होता  तो युवाओं को रोजगार मिलता और उनकी गरीबी दूर होती।

 

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